Baher Barasati Dhara Re Marathi poems on Rain

Baher Barasati Dhara Re Marathi poems on Rain | Mangesh Padgaonkar

Baher Barasati Dhara Re Marathi poems on Rain

बाहेर बरसती धारा रे

मधुनीच वीज थरथरते
क्षण प्राण उजळुनी विरते
करी अधिक गहन अंधारा रे
बाहेर बरसती धारा रे

स्थिर अचल दिशांतुन दाही
निःशब्द वेदना काही
का व्याकुळ आज किनारा रे
बाहेर बरसती धारा रे

हे मुक्त अनावर सगळे
आकाश इथून मज दिसले
घर गमे आज मज कारा रे
बाहेर बरसती धारा रे

मी उन्मन, काही सुचेना
लाटांत निमंत्रण प्राणां
भरतीत मलाच इशारा रे
बाहेर बरसती धारा रे

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